BJP अब बिहार में कर रही है यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत, क्या है सियासी मायने - The Task News

चार राज्यों में मिली जीत से उत्साहित बीजेपी, अब बिहार में यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत कर रही है. इसे बिहार में भी लागू करने की मांग कर रही है. जिससे परेशानी JDU की बढ़ गई है. बीजेपी विधायक अरुण शंकर प्रसाद का कहना है कि यूनिफार्म सिविल कोड अब तक लागू हो जाना चाहिए था। इसकी सख्त जरूरत है। तो वहीं जेडीयू नेता खालिद अनवर ने इसे लेकर कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड की अभी क्या जरूरत है ये बताना होगा। विमर्श करना होगा। jdu सभी धर्म समुदाय छोटी जातियों का सम्मान करती है। हम उनको साथ लेकर चलने में विश्वास करते है.

लेकिन सवाल उठता है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड है क्या है. इसकी जरूरत क्यों बताई जा रही है और इसका विरोध क्यों हो रहा है.

तो चलिए डीटेल से इसे समझते हैं

समान नागरिक संहिता को अगर लागू किया जाता है. तो सभी धर्मों के लिए फिर एक ही कानून हो जाएगा. मतलब जो कानून हिंदुओं के लिए होगा, वही कानून मुस्लिमों और ईसाइयों पर भी लागू होगा.
तो क्या धार्मिक अधिकार छीन जाएगा. बड़ा सवाल है. लेकिन ऐसा नहीं होगा. अगर कॉमन सिविल कोड को लागू किया भी जाता है, तो इससे धार्मिक मान्यताओं के मानने के अधिकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. कॉमन सिविल कोड से हर धर्म के लोगों को एक समान कानून के दायरे में लाया जाएगा. जिसके तहत शादी, तलाक, प्रॉपर्टी और गोद लेने जैसे मामले शामिल होंगे.

तो सवाल ये है कि फिर विरोध क्यों?

विरोध करने वाले ये भी कहते हैं कि इससे अनुच्छेद 25 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन होगा. अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है. समान नागरिक संहिता को लागू करना बहुत टेढ़ी खीर है. वो सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि सभी धर्मों के अपने अलग-अलग कानून हैं. बल्कि इसलिए भी क्योंकि हर धर्म के जगह के हिसाब से भी अलग-अलग कानून हैं. मिसाल के लिए दक्षिण भारत में सगा मामा अपनी सगी भांजी से शादी कर सकता है. लेकिन उत्तर भारत में ऐसा नहीं होता. ऐसे में सदियों से चली आ रही इन प्रथाओं पर रोक लगाना चुनौतीपूर्ण है.

इसके अलावा अभी कई और सवाल हैं. जो नॉर्थ ईस्ट के राज्यों औऱ दक्षिण भारत के राज्यों में उठेगी.

इस लेकर आरजेडी के विधायक राहुल तिवारी का कहना है कि देश मे कॉमन सिविल कोड लागू नहीं किया जा सकता । सभी राज्यों में धर्म जाति से जुड़े लोगों की अलग अलग स्थिति है। bjp चाहती है देश मे आरक्षण व्यवस्था तक खत्म हो जाय। यहां कॉमन सिविल कोड लागू करना संभव नहीं। तो वहीं कांग्रेस के विधायक शकील अहमद का कहना है कि Bjp अभी बहुमत में है कुछ भी कर सकती है। लेकिन उसे इस मसले पर जनता का साथ नहीं मिलेगा।

दरअसल भारत जो है, वो विविधताओं औऱ कई संस्कृतियों का मिलाजुल राज्य है. जहां हर 11 किलोमीटर पर भाषाएं, संस्कृति बदल जाती है. ऐसे में समान सिविर कोड लागू करना बहुत बड़ी टेढ़ी खीर है. और पार पाना मुश्किल है. लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है.