देश के बच्चों में कोरोना के बाद मंडरा रहा है नया खतरा ''कावासाकी सिंड्रोम'' देश के कई अस्पतालें में पहुंच रहे हैं बीमार बच्चे - The Task News

क्या तीसरी लहर की आशंका दूसरी लहर में ही सच बनता जा रहा है, क्या बच्चे संक्रमण के बाद सिंड्रोम के शिकार बनते जा रहे है । देश को चिंता में डालने वाले ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि दिल्ली से ऐसी रिपोर्ट आ रही है कि संक्रमण के बाद बच्चे नई बीमारी कावासाकी सिंड्रोम के शिकार हो रहे है. इस सिंड्रोम ने सबको परेशान कर दिया है।

7 साल की इशांत सेठी दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे हैं. इशांत मल्टी सिस्टमिक इंफ्लामेट्री सिंड्रोम यानी MIS से बीमार हैं लेकिन अब इशांत MIS से रिकवर कर रहे हैं। देश के कई अस्पतालें में ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं जो रिकवरी के बाद बीमार पड़ रहे हैं।
कोरोना के दौरान या रिकवर होने के बाद साइड इफेक्ट के तौर पर कावासाकी सिंड्रोम की बीमारी सामने आई है। इस बीमारी को मल्टी सिस्टमिक इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम भी कहा जाता है। कई बच्चों में कोरोना के बाद खून की नलियों में सूजन आने की समस्या देखी जा रही है। आंखे सूज जाती हैं। बुखार, त्वचा लाल होना, पेट दर्द और बहुत थकान रहने लगती है। इन बच्चों का ब्लड प्रेशर भी कम होने लगता है।

जिन बच्चों को कोरोना हो चुका है, या घरों में कोई न कोई सदस्य कोरोना संक्रमित होने के बाद रिकवर हो चुके हैं उनके परिवार में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे कई बच्चों की त्वचा पर लाल चकत्ते, आंखों के लाल होने, पेट दर्द, उल्टी, दिल की धड़कन बढऩे या बुखार की बीमारियां हो रही हैं। इन लक्षणों को ही मल्टी सिस्टमिक इंफ्लामेट्री सिंड्रोम नाम दिया गया है।
ऐसे बच्चों का भी डी-डाइमर टेस्ट कराया जाता है। इससे शरीर में अंदरूनी सूजन का पता चल सकता है। ये बीमारी हालांकि घातक नहीं लेकिन, लापरवाही भारी भी पड़ सकती है।
अक्टूबर 2020 में आई अमेरिकन पीडियाट्रिक एकेडमी की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में कोरोना के शिकार होने वाले 11% मरीज बच्चे थे।टेस्टिंग के आधार पर दर्ज मामलों में से 3.6% बच्चों की रिपोर्ट कोरोना पॉज़िटिव थी। कुल संक्रमित बच्चों में से 6% को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी, तीसरी लहर में बच्चों पर खतरे का अंदेशा है हालांकि बच्चों का इम्यून सिस्टम ताकतवर हो तो ये बीमारी जल्द ठीक हो जाती है।