कोरोना वायरस चीन की साजिश पर लगी मुहर, कई सालों से वायरस फैलाने पर चल रही थी तैयारी - The Task News

31 दिसम्बर 2019 को एक चिट्ठी विश्व स्वास्थ्य संगठन के दफ्तर में एक बम की तरह पहुंची. पहली बार 31 दिसम्बर 2019 को चीन में World Health Organization के दफ़्तर ने Geneva में अपने मुख्यालय को चौंकाने वाली जानकारी भेजी. इस चिट्ठी मे बताया गया था कि चीन के शहर वुहान में कुछ लोग निमोनिया से मिलती जुलती बीमारी से संक्रमित हुए हैं। निमोनिया फेफड़ों में होने वाले संक्रमण की बीमारी को कहते हैं। WHO ने एक जनवरी 2020 को चीन से इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा और चीन ने इस पर 3 जनवरी 2020 को अपना जवाब दिया। उस समय चीन ने पहली बार दुनिया को ये बताया था कि वुहान में निमोनिया से मिलती जुलती बीमारी फैल रही है। चीन के मुताबिक़ तब तक वुहान में 44 लोग ही इस अज्ञात बीमारी से संक्रमित थे, जिनमें से 11 की हालत बहुत गम्भीर थी। ऐसा चीन दावा करता है
तब चीन ने विस्तार से इस पर जानकारी उपलब्ध कराते हुए WHO से कहा था कि इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि ये बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलती है। तब सिर्फ़ WHO ने ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने चीन पर विश्वास किया लेकिन ये विश्वास अगले कुछ दिनों में ही टूट गया। क्योंकि चीन ने उस समय पूरी दुनिया से झूठ बोला था। चीन के झूठ का नतीजा अब दुनिया के सामने है. दुनिया भर में करोड़ों लोग कोरोना संक्रमित है और लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन ये चीन ही है जो अपने झूठ और फरेब को लगातार ढक रहा है। इस पूरे मामले में शक की सुईं घुम फिर कर चीन की वुहान लैब पर आ जाती है।

वुहान का Virology Institute लगभग 60 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी। उस समय इस Institute का नाम था Wuhan Microbiology Laboratory । इस Institute की जिस लैब में कोरोना वायरस को विकसित करने का शक है, वो वर्ष 2003 में 44 Million Dollar यानी साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत से तैयार हुई थी। ये चीन की अकेली B.S.L 4 लैब है। इसका मतलब है Bio Safety Level 4 । इस Level की लैब में सबसे ख़तरनाक वायरस पर अध्ययन किया जाता है।

इसका मतलब है कि ये पूरे चीन की इकलौती ऐसी लैब है, जिसमें कोरोना वायरस पर अध्ययन हो सकता था। और ऐसा हुआ भी। इस लैब में वर्ष 2014 से कोरोना वायरस पर रिसर्च हो रहा था और इसका ज़िक्र ऑस्ट्रेलिया के एक अख़बार की रिपोर्ट में मिलता है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में वर्ष 2015 में कोरोना वायरस को जैविक हथियार के रूप में विकसित करने के लिए एक रिसर्च पेपर तैयार हुआ था, जिसमें इस लैब के कुछ वैज्ञानिक भी हिस्सा ले रहे थे। यानी इस लैब का कोरोना वायरस से बहुत तगड़ा कनेक्शन है। महत्वपूर्ण बात ये है कि जनवरी 2020 में जब चीन ने पहली बार कोरोना वायरस का Genome Sequencing दुनिया के साथ साझा किया था, तब ये काम भी वुहान लैब के वैज्ञानिकों ने किया था।

ये शक कि वुहान लैब से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला, इसलिए भी सच साबित हो सकता है क्योंकि WHO मान चुका है कि 2004 का SARS कोरोना वायरस भी बीजिंग की Virology लैब से लीक हुआ था। तब WHO ने ये भी कहा था कि ये वायरस इस लैब से एक नही दो दो बार लीक हुआ था, मतलब ये है कि वायरस का लैब से लीक होना नया नहीं है।

कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से दुनियाभर में फैला लेकिन विडम्बना देखिए कि हर देश अब इसे एक स्ट्रेन के रूप में जानता है.जो अलग अलग देशों से आया है. लेकिन चीन का नाम अब कोई नहीं लेता ।