यूक्रेन को नॉर्थ और साउथ कोरिया की तरह दो हिस्सों में बांटना चाहता है रूस, यूक्रेन के इंटेलिजेंस चीफ का बड़ा दावा - The Task News

यूक्रेन के शहर रूस के हमलों को दिन रात झेल रहे हैं. इन शहरों में रहने वाले लाखों लोग या तो देश छोड़ चुके हैं या बंकरों में रह रहे हैं. लेकिन रूस को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. वो तो बस यूक्रेन को तबाह करने के रास्ते पर आगे ही बढ़ता जा रहा है.

रूस की सेना को यूक्रेन में दाखिल हुए एक महीने से ऊपर का समय हो गया है. इस एक महीने में रूस ने हर मोर्चे और हर मौके पर यूक्रेन को खत्म करने की पूरी कोशिश की है । वो अलग बात है कि रूस के लिए कीव को कब्ज़े में लेने का सपना अभी भी काफी दूर है । लेकिन रूस ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. सैन्य वाहनों और बख़्तरबंद गाड़ियों की ये लंबी कतार बता रही है. कि रूस अभी भी पूरी ताकत के साथ कीव की ओर बढ़ रहा है । और इस बार रूस की बख़्तरबंद गाड़ियों पर वी का साइन भी बना हुआ है. जो शायद यही बता रहा है. कि रूस सिर्फ और सिर्फ कीव को जीतना चाहता है । लेकिन कीव की इस जंग में यूक्रेन रूस से हार मानती हुई नज़र नहीं आ रही है. यूक्रेन के सैनिक पूर्वी कीव के नज़दीक इस गांव में दिन रात गश्त लगा रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि रूस कीव की ओर आगे ना बढ़ पाए

यूक्रेन की मानें तो रूस का इरादा सिर्फ कीव पर कब्ज़ा करने तक ही नहीं है. बल्कि वो कीव को कब्ज़े में लेकर यूक्रेन के दो हिस्से करना चाहता है. यूक्रेन के इंटेलिजेंस चीफ किरिलो बुडानेव के मुताबिक पुतिन का मकसद कीव पर कब्जा करना और मुल्क को दो हिस्सों में बांटना है । ठीक वैसे ही जैसे नॉर्थ और साउथ कोरिया अलग हुए । ऐसे में उस रूस को रोकना क्या आसान होगा ? क्योंकि कीव तक पहुंचने के रास्ते में अब तक जो भी रूस के सामने आया, वो पूरी तरह तबाह हो गया । इसका सबसे बड़ा सबूत है, मरियुपोल. वो शहर जहां कभी सड़कों पर गाड़ियां दौड़ती थीं, अब टैंक चल रहे हैं. जिन गलियों में कभी लोगों और गाड़ियों का शोर होता था. वहां अब टैंकों के धमाके सुनाई देते हैं. सिर्फ टैंकों के धमाके ही नहीं, मरियुपोल की गलियों में तो गोलियों की गूंज भी दिन रात सुनाई दे रही है. यहां एक ओर रूसी सेना है. तो दूसरी तरफ चेचेन्या के लड़ाके हैं और इनके बीच में फंसी है यूक्रेन की सेना.

इस युद्ध में रूस अब यूक्रेन में इतना अंदर तक आ चुका है कि उसके लिए फिलहाल पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है और शायद यही वजह है कि रूस आगे बढ़ते रहने में ही अपनी भलाई समझ रहा है. लेकिन कीव की जंग में ये देखना दिलचस्प होगा कि पहले रूस थक जाता है या फिर यूक्रेन हथियार डाल देता है.